May 22, 2009

पंचायती भवन में चल रहा एलौपैथिक चिकित्सालय

रुद्रप्रयाग। रतूड़ा क्षेत्र के दर्जनों गांव आज भी स्वास्थ्य सुविधाओं से वंचित हैं। यहां एक एलोपैथिक चिकित्सालय स्थापित भी किया गया है, लेकिन वह भी सृजनकाल से ही पंचायती भवन में केवल एक फार्मासिस्ट के भरोसे चल रहा है। ऐसे में ग्रामीणों को उपचार के लिए कई किमी दूर जाना पड़ रहा है।
क्षेत्र के रतूड़ा, पोखरी, धारकोट, शिवानंदी, काण्डा, ग्वेफड़, भुनका सहित दर्जनों गांवों की लगभग छह हजार आबादी को स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। शासन से क्षेत्र को स्वास्थ्य सुविधा मुहैया कराने के उद्देश्य से राजकीय एलोपैथिक चिकित्सालय की स्थापना की गई थी, लेकिन कई वर्षो बाद इसका ना तो अपना भवन बन पाया है और ना ही यहां डाक्टर की तैनाती की गई है। यह चिकित्सालय अभी भी फार्मेसिस्ट के भरोसे पंचायती भवन पर संचालित हो रहा है। पूर्व क्षेत्र पंचायत सदस्य सुरेन्द्र सिंह रांगड़, पूर्व प्रधान शम्भू चरण, गुमान सिंह राणा, मुरली सिंह व गोविंद सिंह ने रोष व्यक्त करते हुए आरोप लगाया कि स्वास्थ्य विभाग ने क्षेत्रीय अधिकारियों की रिपोर्ट लिए बिना ही चिकित्सालय खोला है। उन्होंने कहा कि क्षेत्र की आबादी देखते हुए कम से कम पचास बैड वाला चिकित्सालय खोला जाना चाहिए था। उन्होंने कहा कि कई बार स्वास्थ्य विभाग द्वारा चिकित्सालय के भवन के लिए सर्वेक्षण किया जा चुका है, लेकिन अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हो पाई है। उन्होंने शीघ्र कार्रवाई न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है।

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